नॅनोटेक्नोलोजी.....
यह सूक्ष्म चीजों का तंत्रज्ञान और अध्ययन है। एक नैनोमीटर एक मीटर का एक अरबवाँ हिस्सा है जो बेहद सूक्ष्म है, जो खूली आखों से क्या साधारण माइक्रोस्कोप से देखना भी पॉसिबल नहीं है। नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से व्यक्ति अणुओं / परमाणुओं को अलग-अलग देख और उनमें हेरफेर भी कर सकते है।
1981 में स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप की खोज की गई थी जिसकी मदद से एक व्यक्ति परमाणु को देखने लगा। इस पहल के साथ विज्ञान के नए युग का जन्म हुआ जिसे हम नैनोटेक्नोलॉजी कहकर बुलाते हैं।
नैनोटेक्नोलोजी का इस्तेमाल हमारे जीवन में उपयोग होनेवाले करीब करीब हर क्षेत्र में किया जाने लगा है, जैसे...
👉 इलेक्ट्रानिक्स
👉 सिंथेटिक सामग्री का उत्पादन (मशीनरी इंजीनियरिंग, फार्मेसी, प्रसाधन सामग्री)
👉 तेल शुद्धिकरण।
👉 सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग, बैटरियों के लिए पॉलिमर, गोंद उत्पादन - नैनोग्ल्यू।
👉 ऑटोमोबाइल उद्योग, अंतरिक्ष उद्योग, चिकित्सा।
👉 ऊर्जा।
👉 गर्मी-इन्सुलेशन, शोर-इन्सुलेशन, विभिन्न फिल्टर।
1981 में स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप की खोज की गई थी जिसकी मदद से एक व्यक्ति परमाणु को देखने लगा। इस पहल के साथ विज्ञान के नए युग का जन्म हुआ जिसे हम नैनोटेक्नोलॉजी कहकर बुलाते हैं।
नैनोटेक्नोलोजी का इस्तेमाल हमारे जीवन में उपयोग होनेवाले करीब करीब हर क्षेत्र में किया जाने लगा है, जैसे...
👉 इलेक्ट्रानिक्स
👉 सिंथेटिक सामग्री का उत्पादन (मशीनरी इंजीनियरिंग, फार्मेसी, प्रसाधन सामग्री)
👉 तेल शुद्धिकरण।
👉 सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग, बैटरियों के लिए पॉलिमर, गोंद उत्पादन - नैनोग्ल्यू।
👉 ऑटोमोबाइल उद्योग, अंतरिक्ष उद्योग, चिकित्सा।
👉 ऊर्जा।
👉 गर्मी-इन्सुलेशन, शोर-इन्सुलेशन, विभिन्न फिल्टर।


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