21वी सदी की हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी.....

             सुदूर दवाइया(टेलीमेडिसिन)

  स्थान की परवाह किए बिना रोगियों के साथ चिकित्सकों को जोड़ता है।  टेली-मेडिसिन का उपयोग बढ़ रहा है क्योंकि डॉक्टर और मरीज़ दूर के रोगियों की अधिक तेज़ और सुविधाजनक देखभाल तक पहुँच के लाभों को पहचानते हैं।

                    कृत्रिम होशियारी
             (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)

  यह कंप्यूटिंग की अगली पीढ़ी है। आर्टिफिशियल इनटैलिजेन्स का उपयोग करने वाली मशीनों के डेटा का विश्लेषण करके मानव विचार और कार्रवाई की नकल करने के लिए प्रोग्राम किया जाता है, जो समस्याओं का पूर्वानुमान लगाने और हल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

              पहनने योग्य प्रौद्योगिकी
               (वियरेबल टेक्नोलॉजी)

  यह पुरानी बीमारियों की दूरस्थ निगरानी के लिए व्यक्तिगत फिटनेस ट्रैकर से परे विस्तारित हुआ है। अब इसमें आईओटी शामिल है, जुड़े चिकित्सा उपकरणों का एक नया मोर्चा जो रोगी को अस्पताल से छुट्टी देने के लंबे समय बाद व्यवहार और शारीरिक लक्षणों को ट्रैक करके उसपर नज़र बनाए रखता है, जो आगे के इलाज़ के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

                       मशीन लर्निंग

  सहज ज्ञान युक्त कंप्यूटर एल्गोरिदम बनाता है जो इस आधार पर विकसित होता है कि हम उनका उपयोग कैसे करते हैं।  हेल्थकेयर में, मशीन लर्निंग को क्लिनिकल कार्य प्रवाह में सुधार के लिए स्वचालन में वृद्धि के लिए उत्प्रेरक की भूमिका निभाता है।

                       3 डी प्रिंटिग

  ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर्स जो कुछ भी सीखते हैं उससे बहुत कुछ बदलता हैं।  3 डी प्रिंटिंग स्क्रूज का स्थान, प्लेट्स, और प्रत्यारोपण की नियुक्ति कर सकती है - रीढ़ की हड्डी या कपाल प्रत्यारोपण से लेकर दंत बहाली तक अधिक सटीक तरह से लगाया जा सकता है और कस्टम फिट किया जा सकता है।

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