हमारा प्राचीन अल्ट्रासाउंड मशीन .....

  हमारे महान महाकाव्य 'श्रीमद् भगवतगीता' विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एक अनूठा उदाहरण है। 3 वें कैंटो में, 30 वें अध्याय में, माता के गर्भ में भ्रूण के विकास का एक विशद वर्णन का उल्लेख है। भ्रूण वृद्धि के प्रत्येक चरण में बरती जाने वाली सावधानियों का उल्लेख विस्तृत तरीके वर्णन किया गया है। इस तरह की आविष्कारिक जानकारीयां हमारी चिकित्सा पद्धति में हजारों वर्षों  पहले से ही मौजूद हैं।

   अगर हम एक मानक पाठ्यपुस्तक में दी गई जानकारी जैसे कि एनाटॉमी के भ्रूण खंड के साथ दी गई जानकारी की तुलना करते हैं, तो दो स्रोतों से प्राप्त जानकारी में बहोत ज्यादा समानताएं पाते हैं।

   हमारे स्त्रीरोग विशेषज्ञों ने धीरे-धीरे पता किया है कि भ्रूण का विकास गर्भावस्था में कैसे होता है। यह सब भगवद्गीता के हजारों सालों बाद तकनीक द्वारा विकसित जटिल उपकरणों की मदद से संभव हो पाया है। हमारे धर्मग्रंथों में हर जटिल समस्याओं का समाधान मिलेगा जिसे अब तक साइंस और टेक्नोलॉजी भी ढूंढ़ नहीं पाया हैं।

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