आंखों के आश्यर्चजनक तथ्य.....
"आंखे, आत्मा की खिड़की होती हैं" यह कहावत आंखों के लिए सौ प्रतिशत फीट बैठती हैं। आंखें, शरीर का ऐसा अंग जिसकी महिमा का गुणगान करते हम नहीं थकते, और यह उतना ही सच है। कहते हैं कि आंखे इंसान का दर्पण होता है। आंखों से इंसान की पहचान की जा सकती हैं। इसमें प्रेम, गुस्सा, दुःख, आनंद, विरह, सपना, सोच इन सभी गुण, अवगुणों को भी देखा जा सकता है।
एक प्राचीन प्रथा, जो अब तक चल आ रही है, जिसमें आंखों को रोशनी के रूप में जाना जाता है। जिसके तहत दो प्रतिभागी एक दूसरे की आंखों में समय की विस्तारित अवधि के लिए एक दूसरे को घूरते रहते हैं।
जब दो लोगों के बीच आंखों का संपर्क शुरू होता है और उसे बनाए रखा जाता है, तो एक अदृश्य ऊर्जा का सर्किट स्थापित होता है। यह प्रेरना, उत्साह, दृष्टि पिछले जीवन के अनुभवों और यहां तक कि दूरस्थ देखने के लिए जाना जाता है। यहां से चेतना की उच्च अवस्था तक पहुंचना संभव है। यह सारी बातें मात्र आंखों के माध्यम से अनुभव की जा सकती हैं। किसी कवि ने सच ही कहा है, "आंखों ही आंखों में इशारा हो गया - बैठे बैठे जीने का सहारा हो गया".
एक प्राचीन प्रथा, जो अब तक चल आ रही है, जिसमें आंखों को रोशनी के रूप में जाना जाता है। जिसके तहत दो प्रतिभागी एक दूसरे की आंखों में समय की विस्तारित अवधि के लिए एक दूसरे को घूरते रहते हैं।
जब दो लोगों के बीच आंखों का संपर्क शुरू होता है और उसे बनाए रखा जाता है, तो एक अदृश्य ऊर्जा का सर्किट स्थापित होता है। यह प्रेरना, उत्साह, दृष्टि पिछले जीवन के अनुभवों और यहां तक कि दूरस्थ देखने के लिए जाना जाता है। यहां से चेतना की उच्च अवस्था तक पहुंचना संभव है। यह सारी बातें मात्र आंखों के माध्यम से अनुभव की जा सकती हैं। किसी कवि ने सच ही कहा है, "आंखों ही आंखों में इशारा हो गया - बैठे बैठे जीने का सहारा हो गया".


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