फोन बन सकता है करोना संक्रमण का बड़ा कारण....

  हम अक्सर हमारे नज़दीकी चीजों पर ध्यान देना भूल जाते हैं और दूर की चीजों की तरफ़ आकर्षित होते हैं। जो हमारे लिए कभी कभी फायदेमंद या घातक साबित हो सकती है। एक ऐसी ही बात इस करोना महामारी के दौरान सामने आई हैं।

   करोना महामारी का संक्रमण सांस के माध्यम से होता है यह बात सारे संसार को ज्ञात है और श्वसन नाक से होता है। नाक के आसपास मुख,आंख और कान भी होते हैं, जिनका डायरेक्ट संबंध मोबाइल पर संवाद के दौरान होता है। याने कम्युनिकेशन के समय नाक से होने वाले श्वसन से करोना का संक्रमण हो सकता है। संक्रामक वायरस मोबाइल के किसी भी हिस्से पर बैठ सकते हैं।

   मोबाइल फोन की सतह एक विशिष्ट उच्च जोखिम वाली होती है जो सीधे मुंह या चेहरे के संपर्क में आती है ऐसा बीएजे ग्लोबल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक लेख में डॉक्टरों ने कहा हैं। अच्छे से हाथ भले ही धुले क्यों न हों, पर बार बार फोन का स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा इस्तेमाल भी सबके लिए संक्रमण का कारण बन सकता है। ऐसी संभावना एक लेख में बताई गई हैं। इस आंखें खोल देने वाले लेख जानेमाने समुदाय एंव परिवार चिकित्सा विभाग के डॉ विनीत कुमार पाठक, डॉ एम मोहन कुमार, डॉ सुनील कुमार, डॉ करपागा प्रिया पी और डॉ उत्सव राज ने लिखा है।

   इस बात को अब तक डब्ल्यूएचओ ने भी किया है नजरअंदाज

   डब्ल्यूएचओ और सीडीसी जैसे कई विभिन्न स्वास्थ्य संगठन अब तक कई दिशानिर्देश अपनी तरफ से जारी कर चुके हैं।
इनमें कई उपाय बीमारी पर नियंत्रण और रोकथाम के लिए बताए गए हैं। हालांकि अध्ययन में ये देखने को मिल रहा है कि फोन के इस्तेमाल का जिक्र किसी भी दिशानिर्देशों में नहीं किया गया है।

   हाथ धोने का जिक्र डब्ल्यूएचओ के संक्रमण नियंत्रण एंव रोकथाम दिशानिर्देश में है, लेकिन मोबाइल के बारे में कहीं भी कुछ भी नहीं कहा गया है अब तक। ऐसा माना जा रहा है कि मास्क, कैप और चश्मों के बाद मोबाइल ही ऐसा है जो सीधे चेहरे, नाक और आंख के संपर्क में आता है, वैसे देखा जाए तो बाकि चीजें धोई जा सकती हैं, लेकिन फोन को नहीं धोया जा सकता, इसलिए संक्रमण का खतरा ज्यादा बना रहता है। इसलिए सबसे ज्यादा केयरफुल, अलर्ट  मोबाईल से रहना बहोत जरूरी हो गया है।

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