अब सूरज भी मेड इन चाइना .....
अनहोनी को होनी करना अब तकनीकि दुनिया के बाए हाथ का खेल बन गया है। इसका एक ताजा उदाहरण आपके सामने रख रहे हैं। चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन के साथ साउथवेस्टर्न इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स के वैज्ञानिकों ने मिलकर 2006 में एक प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था जिसका एक अच्छा फल अब मिल गया है। चीन ने अपना खुद का सूरज बना लिया है।
शुक्रवार को इस सफलता का ऐलान करते हुए चीनी मीडिया ने बताया कि इस सूरज को बनाने का मकसद ज्यादा से ज्यादा सोलर एनर्जी प्राप्त करना है। खासकर जब क्लाइमेट क्लाउडी हो, बारिश के मौसम में, जब सूरज न निकला हो, ऐसी स्थितियों में सूरज की गर्मी मिल सकेगी। इस कृत्रिम सूरज का नामकरण 'HL-2M Tokamak' ऐसे कीया गया है। इस तरह के प्रयोग के लिए चीन के Leshan शहर में एक रिएक्टर तैयार किया गया है, जिसने अपना काम शुरू कर दिया है।
इस आर्टिफिशियल सूरज को प्रज्वलित करने के लिए ईंधन के रूप में हाइड्रोजन गैस को 5 करोड़ डिग्री सेल्सियस के तापमान पर गर्म करना और उस तापमान को 102 सेकंड तक स्थिर रखकर सूरज की गरमी को महसूस करना इस उद्देश्य को सफलतापू्र्वक पूरा कर लिया गया है।
वैसे असली सूरज में हीलियम, हाइड्रोजन जैसी गैसें उच्च तापमान पर क्रिया करती हैं। इस दौरान 150 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक ऊर्जा निकलती है। यानी 15 करोड़ डिग्री सेल्सियस तापमान होता है। कीसी ख़तरे को टालने के लिए सूरज बनाने के दौरान इसके परमाणुओं को प्रयोगशाला में विखंडित किया गया।
प्लाज्मा विकिरण से सूर्य का औसत तापमान पैदा किया गया, जिसके बाद उस तापमान से फ्यूजन यानी संलयन की प्रतिक्रिया हासिल की गई। फिर इसी आधार पर अणुओं का विखंडन हुआ, जिससे उन्होंने ज्यादा मात्रा में ऊर्जा उत्सर्जित की। यह प्रक्रिया लगातार समय बढ़ा-बढ़ाकर दोहराई जाती रही। इस रिएक्टर का नाम है HL-2M रिएक्टर। यह चीन का सबसे बड़ा आधुनिक न्यूक्लियर फ्यूजन एक्पेरिमेंटल रिसर्च डिवाइस है। वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि यह डिवाइस स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के लिए नेचरल सूरज का दूसरा विकल्प बन सकता है।
खबरों के अनुसार, न्यूक्लियर फ्यूजन एनर्जी का विकास चीन की एनर्जी की जरूरतों को पूरा करने का एकमात्र तरीका नहीं है। बल्कि इससे चीन की अर्थव्यवस्था ऊर्जा के विकास के लिए भी जरूरी है। चीनी वैज्ञानिक साल 2006 से ही छोटे न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर के विकास पर काम कर रहे थे और अब आर्टिफिशियल सूरज की मदद से ऊर्जा के द्वार खुल गए हैं।
शुक्रवार को इस सफलता का ऐलान करते हुए चीनी मीडिया ने बताया कि इस सूरज को बनाने का मकसद ज्यादा से ज्यादा सोलर एनर्जी प्राप्त करना है। खासकर जब क्लाइमेट क्लाउडी हो, बारिश के मौसम में, जब सूरज न निकला हो, ऐसी स्थितियों में सूरज की गर्मी मिल सकेगी। इस कृत्रिम सूरज का नामकरण 'HL-2M Tokamak' ऐसे कीया गया है। इस तरह के प्रयोग के लिए चीन के Leshan शहर में एक रिएक्टर तैयार किया गया है, जिसने अपना काम शुरू कर दिया है।
इस आर्टिफिशियल सूरज को प्रज्वलित करने के लिए ईंधन के रूप में हाइड्रोजन गैस को 5 करोड़ डिग्री सेल्सियस के तापमान पर गर्म करना और उस तापमान को 102 सेकंड तक स्थिर रखकर सूरज की गरमी को महसूस करना इस उद्देश्य को सफलतापू्र्वक पूरा कर लिया गया है।
वैसे असली सूरज में हीलियम, हाइड्रोजन जैसी गैसें उच्च तापमान पर क्रिया करती हैं। इस दौरान 150 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक ऊर्जा निकलती है। यानी 15 करोड़ डिग्री सेल्सियस तापमान होता है। कीसी ख़तरे को टालने के लिए सूरज बनाने के दौरान इसके परमाणुओं को प्रयोगशाला में विखंडित किया गया।
प्लाज्मा विकिरण से सूर्य का औसत तापमान पैदा किया गया, जिसके बाद उस तापमान से फ्यूजन यानी संलयन की प्रतिक्रिया हासिल की गई। फिर इसी आधार पर अणुओं का विखंडन हुआ, जिससे उन्होंने ज्यादा मात्रा में ऊर्जा उत्सर्जित की। यह प्रक्रिया लगातार समय बढ़ा-बढ़ाकर दोहराई जाती रही। इस रिएक्टर का नाम है HL-2M रिएक्टर। यह चीन का सबसे बड़ा आधुनिक न्यूक्लियर फ्यूजन एक्पेरिमेंटल रिसर्च डिवाइस है। वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि यह डिवाइस स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के लिए नेचरल सूरज का दूसरा विकल्प बन सकता है।
खबरों के अनुसार, न्यूक्लियर फ्यूजन एनर्जी का विकास चीन की एनर्जी की जरूरतों को पूरा करने का एकमात्र तरीका नहीं है। बल्कि इससे चीन की अर्थव्यवस्था ऊर्जा के विकास के लिए भी जरूरी है। चीनी वैज्ञानिक साल 2006 से ही छोटे न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर के विकास पर काम कर रहे थे और अब आर्टिफिशियल सूरज की मदद से ऊर्जा के द्वार खुल गए हैं।


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